Kavita Hindi Me | Hindi Poems [2020]

Kavita Hindi Me Viral Poem In Hindi 

Hindi Poems | Hindi Kavita | Hindi Poetry | Poems In Hindi 

Hindi Kavita: Hindi Poem on Nature, Love, Patriotic 

Kavita Hindi Me

Kavita Hindi Me | Hindi Poems



सजीले बादल
सुरमई रंग के बादल. करीने से लगा काजल।
बुझाने प्यास धरती की, सजीले आ गये बादल।।

चलेगी नाव नदिया में, खिलेंगे फूल बगिया में।
सजेगी माँग धरती की. मिले सौगात-डलिया में।।

पकेगी धान की पायल, फलेगी जो पड़ी घायल।
लुटेगी खेप मोतिन की, बजेगी गगन में माँदल।।


चलेंगे दौर झूलों के, हटेंगे झौं र शूलों के।
हँसेगी आँख धरती की, लगेंगे बौर फूलों के।।



तीन रंग से बना तिरंगा, लहर-लहर लहराता है।
ऊँचा उठकर नील गगन में, भारत के गुण गाता है।।

केसरिया बल भरने वाला, श्वेत शांति का दाता है।
हरा रंग है हरियाली का, खुशहाली ले आता है ।।


हर पल काम करें हम अपना, समय चक्र सिखलाता है।
सादा-सीधा झंडा अपनां, गौरव गाथा गाता है ।।


खादी से यह बना तिरंगा, स्वाभिमान सिखलाता है।
आये कोई कभी देश में, सबका मान कराता है।।

परिवार
अपने घर रहते हैं सात, आपस में सब करते बात।
रहना-सहना एक समान, सुख की होती है बरसात।।

दादा-दादी, पापा-माम, पूसी जब्बर से आराम।
मैं बालक नन्हा इन्सान, करता रहता अपना काम।।

दादी रोज बताए बात, दादा देते ला सौगात ।
पापा करते बाहर काम, पहरा दे जब्बर तैनात।।

मम्मा रोज पकाए भात, पूसी का पहरा
दिन-रात सात जनों का यह परिवार,

कभी न करता कोई घात।।

प्रेम
नफरत करना ना-ना-ना। प्रेम बढ़ाना हाँ-हाँ-हाँ।।
झूठ फरेबी उचित नहीं। काम सुधरते नहीं कहीं।।

छोड़-छोड़ हिंसा पगले। कुछ न मिले हिंसा बदले।।
प्रेम भाव सबसे पहले। कपट भाव से दिल दहले।।

करें प्रेम है आजादी। प्रेम बिना है बर्बादी।।
प्रेम बड़ा अनमोला है। प्रेमी तो मिठबोला है।।

खुद जी ले तू जीने दे। रस का प्याला पीने दे।।
दान प्रेम का दे पगले। मान प्रेम का अब कर ले।।

तिरंगा
तीन रंग से बना तिरंगा, लहर-लहर लहराता है।
ऊँचा उठकर नील गगन में, भारत के गुण गाता है।।

केसरिया बल भरने वाला, श्वेत शांति का दाता है।
हरा रंग है हरियाली का, खुशहाली ले आता है ।।

हर पल काम करें हम अपना, समय चक्र सिखलाता है।
सादा-सीधा झंडा अपनां, गौरव गाथा गाता है ।।

खादी से यह बना तिरंगा, स्वाभिमान सिखलाता है।
आये कोई कभी देश में, सबका मान कराता है।।

- राखी
राखी ले आई बहना बहना का है यह कहना।
राखी बँधवा ले भैया, बहना लाई है गहना।।

बहन तिलक करती भैया, बनी रहे, तेरी छैया।
भाई जग में दुर्लभ है, माँ जाया मेरा भैया।।

दुआ माँगती है बहना, पड़े न हमें दूर रहना।
बहना-भाई पास रहें, सुख-दुख मिलकर हो सहना।।

भाई प्यार करे बहना, आ बहना राखी पहना।
राखी है अनमोल- सदा, गहनों से बढ़ कर गहना।।
Kavita Hindi Me
सीटी
पापा ले आये सीटी, रौब जमाये ये सीटी।
खाकी बरदी पहनी है, बना सिपाही ले सीटी।।

पी-पी सुनकर चोर भगे, सीटी सुनकर लोग जगे।
हल-चल चारों ओर हुई, किसकी हिम्मत कौन ठगे।।

सीटी बजती रेल चले, इंजन सीटी दिये चले ।
सीटी से चलती-रूकती, लटकी रहती गार्ड गले ।।


सीटी से होती पीटी पल-पल में बजती सीटी।
उछल-कूद होती इससे, सीटी सचमुच है स्वीटी।।

खरवूजा-तरबूजा
खा-खा, खा-खा खरबूजा, ता-ता, ता-ता तरबूजा।
अटा पड़ा है खरबूजा, पटा पड़ा है तरबूजा।।

लुढ़क गिरा है तरबूजा, ठसक भरा है, खरबूजा।
दो तबलों सा तरबूजा, बड़ी गेंद सा खरबूजा।।

दोनों पानी की मेवा, लता-बहन करती सेवा।
दोनों मिसरी से मीठे, शरबत पड़ जाते फीके।।

हरा-भूरिया खरबूजा, लाल ललौही तरबूजा।
पना बना है खरबूजा, पानी पीना तरबूजा।।

झाड़ी बेर
लाल-लाल झाड़ी के बेर. लगा पड़ा बेरा का ढेर।
मन ललचाता इनको देख. जीभर खाएँ मीठे बेर।।

जंगल की मेवा है बेर. मौसम आया आते बेर।
ये कुदरत का है उपहार, आओ खाएँ करें न देर ।।

बड़े रसीले मीठे बेर, बकरी खाती झाड़ी घेर।
दूर-दूर तक जाती गंध, कहती सबसे खाओ बेर।।

ऋतु आए तो लगता ढेर, ऋतु जाए तो भगता बेर।
लाल-लाल कंचों की भेंट, खाओ-खेलो गुठली ढेर।।

गाय
माता मुझको दे दो रोटी. गैया को खिलवानी है।
रोटी मिल जाएँ दो मोटी, उसकी भूख मिटानी है।।

गाय हमारी भोली-भाली जंगल चरने जाती है।
संध्या हुए लौट घर चाली, अपने खूटे आती है।।

गाय हमें बलवान बनाती, तन के रोग मिटाती है।
गाय हमें धनवान बनाती, मन में बहुत सिहाती है।।

गैया को मैया मत समझो, वह तो माता की माता।
पंच गव्य देती है जगको, सभी सुखों की वह दाता।।

कोयल-कौआ
कोयल काली, है दिल वाली।
ऋतु बसन्त में, वह मतवाली।।

बैठ बाग में, गाना गाती।
कूक-कूर कर, हमें रिझाती।।

पास बुलाकर, प्यार बढ़ाती।
गाना गाकर, वह उड़ जाती।।

कौआ कैसा, कोयल जैसा।
पर गुणवान न, होता वैसा।।

Hindi Kavita

भाई-बहन
मैं भाई मेरी बहना, साथ-साथ हमको रहना।
माँ की आँखों के तारे, दोनों माँ के दो गहना।।

माता हमको प्यार करे, जो माँगा तैयार करे ।
खेल खिलौना ढेरों हैं, सुख के साधन अटे परे।।

साथ-साथ खेलें खाएँ, साथ-साथ मेले जाएँ।
पापा लाड़ लड़ाते हैं, दोनों गोदी बैठाएँ।।

साँझ हुई हम थक जाते, माँ के पास चले आते।
माता दूध पिला देती, अगल-बगल हम सो जाते।।

ककड़ी-मकड़ी
ककड़ी, ककड़ी, ककड़ी, मकड़ी से जा अकड़ी।
उसने पूरा जाला, फँसी जाल में ककड़ी।।

पास पड़ी थी लकड़ी, जगह बहुत ही सँकड़ी।
ककड़ी बोली बहना, मैं जाले में जकड़ी।।

अब आएगी मकड़ी, मन में अकड़ी-अकडी।
तुम उस पर गिर जाना, लँगड़ी होगी मकड़ी।।

मकड़ी पकड़े लकड़ी, बच निकलेगी ककड़ी।
टूट पड़ेगा जाला, छूट भगेगी ककड़ी।।


आम और बरगद
आम हमारे हैं दादा, कलमी काट खिलाते हैं।
बरगद अपने परदादा, गूलर लेकर आते हैं।

आमों की खुशबू प्यारी, हमको बहुत सुहाती है।
बरगद की छाया न्यारी, मीठी नींद सुलाती है।।

आमों के पत्ते चिकने, वंदनवार बनाते हैं।
बरगद के पत्ते चौड़े, झट पत्तल बन जाते हैं।।


दादा आम बड़े दानी, जी भर आम लुटाते है।
बरगद दादा बड़ ज्ञानी, बीती बात बताते है ।।

सच
सच ही है साथी अपना, सत्य बोलना है तपना।
इसका साथ न छोडेंगे, सच होगा अपना सपना।।

पड़ा झूठ से भी पाला, बहता ज्यों गंदा नाला।
झूठे संग झूठा होना, नहीं उचित गंदा नाला ।।

सच तो निर्मल होता है, मैले को वह धोता है।
सच की डगर साफ सुथरी, सच्चा कभी न रोता है।।

जब बोलें हम सच बोलें, बोली में मिसरी घोलें।
झूठे से क्या है नाता? सच को दिल में जा तोलें।।


गुब्बारा मन भाया है
माँ मुझको पिज्जा ना देती, माखन खूब खिलाती है।
मुझको जब भी भूख लगे तो, मीठा दूध पिलाती है।।

पापा फल लेकर घर आते, चाट मुझे मन भाती है।
खट्टी-मिट्ठी नारंगी से भूख नहीं बुझ पाती है।।

दीदी खेल खिलाती रहती, घर में नाव बनाती है।
नाव चलाती है पानी में, मेरे मन को भाती है।।


शाम हुई हम गये घूमने, मन अपना हरषाता है।

गुब्बारे को उड़ते देखा, अपना मन ललचाता है।

बालू का घर
अपने घर पर बालू है, भीगी-ठंडी बालू है।
उसे पैर पर थाप लिया, थपकी दे घर खड़ा किया।।

साथी ने देखा घर को, थापा उसने बालू को।
जिसने देखा रहा बना, अपनी बस्ती बसी घना।।

अपने घर सब खड़े हुए, रखवाली पर अड़े हुए।
अपने घर को सजा रहे, फूलों को वे लगा रहे ।।

अपना घर सबको प्यारा, बालू का घर है न्यारा।
हमने इसे बनाया है, मन अपना हरसाया है।।

हैया-हैया-हैया
हैया-हैया-हैया हैया-हैया-हैया।
हवा चली पुरवैया।।

मेरे प्यारे भैया, चले आम की छैया।
मुरली मधुर बजाना, लहरें ताल तलैया।। हैया०।।

साथ चलेगी मैया, सबकी धीर धरैया।
हमें नाव पर जाना, जिसका तू खेवैया।। हैया0।।

मेरे प्यारे भैया, दूंगी एक रूपैया।
बापस घर को आना, ना ता-ता थैया।। हैया।।।

नीबू
नीबू पेड़ बड़ा फलदार, नीबू रस का है सरदार ।
पीला-पीला अंडाकार, बड़ा सरस इसका संसार ।।

नीबू फल है सदाबहार, एक पेड़ पर लगें हज़ार।
इसकी महिमा अपरंपार, शीतल पेय प्राण-आधार ।।

नीबू हरता पेट विकार, इसके गुण पर करें विचार।
मिले विटमिन सी भरपूर, जब चाहें पीलें रस चूर।।

नीबू का डलता आचार, सदा बहे इसकी रसधार।
नीबू से करते सब प्यार, सभी गुणों का यह भंडार।

Hindi Poems | Hindi Kavita 

राजा भैया
माँ मेरा कसूर बतला दे, मुझसे क्यों रूठी है।
दीदी ने जो चुगली की है, वह सचमुच झूठी है।।

दीदी खाती रोज कटारे, कहो कहाँ से लाऊँ?
दीदी मुझको ताना मारे, कैसे उसे मनाऊँ ? ?

इसीलिये गुस्सा है दीदी तुमसे चुगली करती।
मुझसे तनिक बड़ी है दीदी, इसीलिये ना डरती।।

तू नटखट है मेरे मुन्ना, आकर मुझे हँसाया।
दीदी तुझ पर प्यार जताती, तूने उसे रुलाया।।

बिटिया
मैं भोर हुए उठ जाऊँ, भाई सँग खे खू खाऊँ।
बागों की सैर करूँ मैं, तितली सा रूप सजाऊँ।।

कलियों सी हँसी हँसू मैं, काँटों को चुभन सहूँ मैं।
मैं भँवरी बन मँडराऊँ, खुशबू सा बन महकूँ मैं।।

मैं ने सीखा है चलना, मैं जानें कभी न रुकना।
आजाद किस्म का रहना, मैं जानें कभी न झुकना।।

यह सूरज क्यों तपता है? दीपक भी क्यों जलता है!
मैं सब समझ गई हूँ, बिन तपे न कुछ मिलता है।।

अब पनपाएँ हरियाली
ऊँचे-नीचे पेड़ खाड़े, फल फूलों से लदे पड़े।
कितने सुन्दर हरे-भरे! हम छोटे है पेड़ बड़े ।।

मौसम पर इनका पहरा, धरती से नाता गहरा।
मेघ बुलाकर ये लाते, इनके बिन जीवन ठहरा।।

पेड़ों से है हरियाली, पेड़ों से है खुशहाली ।
प्राण-वायु के दाता हैं, ये हैं जीवन के माली।।

भाषण कभी न देते हैं, पीड़ा सब हर लेते हैं।
वोट माँगते कभी न वे, देकर ही सुख लेते है।

पापा
माँ ने मुझको बता दिया है, आप पितांजी हैं मेरे।
इसीलिये तो मुझे मिल गये, रूप-रंग पापा तेरे ।।

माता मुझको दूध पिलाये, बेहद लाड़ लड़ाती है।
तुम भी पापा पप्पी लेते, माता खुश हो जाती है।।

खेल खिलौने पापा लाते, माता हमें नचाती है।
पापा हमको खूब हँसाते, माता गाना गाती है।।

मुझको जो भाती हैं चीजें, पापा सब पहचान गये।
चीजें लाते कभी न खीजें, पापा मन से मान गये।।

वीर प्रताप
राणा था रणधीर अकेला, था प्रताप प्रणवीर, अकेला।

साहस का पुतला था भारी, मेवाड़ी सपूत अलबेला।।

मर्यादा का प्रतिपालक था, दुश्मन का प्रतिपल घालक था।
अन्त समय तक टेक न छोड़ी, वह स्वराज्य का संचालक था।।

कितने कष्ट वीर ने झेले. भूख प्यास के पड़े झमेले।
देश-प्रेम का दीवाना था, लगा दिये मुण्डों के रेले।।

पर्वत पर चढ़ युद्ध लड़ा था, हल्दी घाटी बीच अड़ा था।
भुजदण्डों में ताकत भारी, मातृभूमि को चूम खड़ा था।।

कामना
अपनी धरती अपना जल,
फलती बगिया, मीठे फल।
सरस रहें सब सरस रहें।।

पल-पल बहता रहे पवन,
रहे कहीं ना सड़न-गलन।
विमल रहें सब विमल रहें।।

सब हैं भाई और बहन,
सुन्दर सबके रहन-सहन।
सहज रहें सब सहज रहें।।

अपनी सबकी एक डगर,
अपनी भाषा एक सफर।
सरल रहें सब सरल रहें।।

गूंगे का गुड़
सूरज देता चंदा देता, देती धरती माता।
बादल लाकर जल बरसाता, वायु प्राण की दाता।।

नजर उठाकर, जिघर देखिये, उधर खड़ा है दाता।
देता रहता दान विहँसता, दाता नहीं अघाता।।

हमने पूछा जा दानी से, क्यों इतना देते हो?
क्या अनुभव करते तुम इससे, बचा न क्यों लेते हो।।

हमको सुख मिलता है भाई, इसीलिये देते है।
जीवन की सरिता लहराई, देकर सुख लेते हैं।।

डर
डरा रहा हैं हमको डर, बना कहाँ है उसका घर?
घर में रहता या बेघर, उसकी ले लें आज खबर।।

हम जाते घर के अंदर, फिर आते घर से बाहर।
कहीं नहीं टकराता डर, कौन डराता फिर आकर ।।

शाला में मिलते गुरूवर, पढ़ें प्रेम रो सब मिलकर।
पाठ दिखाएँ हम लिखकर, भाग न आते हम डरकर।।

हमको जो लगता है डर, घुसा पड़ा माँ के अंदर।
डरती रहती माँ दिनभर, हम बच्चे सब रहें निडर।।

हिंदी कविता Hindi Kavita

पानी
पानी बिन सावन सूनौ, पानी सौं सब सुख दूनौ।
पानी सौं उपजै खेती, पानी बिन झुलसै रेती।।

पानी सौं पेड़ उगेंगे, फल-फूल सभी पनपेंगे।
पानी बिन छाँह न होती, पानी सौं जीवन मोती।।

पानी सौं बिजली निपजै, पानी सौं मछली उपजै।
पानी सौं यंत्र चलावें, जीवन को मंत्र बतावें ।।

पानी है रस की खानी, रस बिन सब नीरस जानी।
पानी है सुन्दर सपनौ, पानी सौं कल है अपनौ।।

एक रंग में रंगे हुए
भारत है आजाद वतन, अपना यह अनमोल रतन।
प्यार करें इसको हरदम, महक रहा बेजोड़ चमन।।

हम इसकी सब संतानें, इसकी रग-रग पहचानें।
प्रेम डोर से बँधे हुए, सबको अपना कर मानें।।

हमने जग को बता दिया, मेल मिलाकर दिखा दिया।
हम अनेक हैं भारत में, भेद-भाव सब भुला दिया।।

कर ली हमने तैयारी, हमने अब बाजी मारी।
जो टकराया हार गया, महकी केसर की क्यारी।।

बच्चे
हम सब छोटे बच्चे हैं. हम सब सीधे सच्चे हैं।
आगे बढते जाते हैं, हम सब धुन के पक्के हैं।।

हम फूलों की फुलवारी, अपनी खुशबू है प्यारी।
हम साहस के पुतले हैं, हिम्मत है जग से न्यारी।।

हम खोलेंगे-कूदेंगे, सब नाचेंगे-गाएँगे।
मनमौजी हैं हम बच्चे, सबको प्यार, लुटाएँगे।।

हम कोयल बनकर चहकें, फूलों सा महँ-महँ महकें।
फूल-गुच्छ हम भारत के, तितली बनकर हम लहकें।।

करें सदा इनका गुण-गान
हम जिनकी प्यारी संतान, उनका कर लें हम सम्मान।
सुमिरन कर लें उनका नाम, ये हैं सच्चे तीरथ-धाम।।

अपना यही एक है काम, करना नहीं नाम बदनाम।

उनका कहना लें हम मान, वनना नहीं हमें शैतान।।

खान-पान की हो परवाह, पूरी उनके मन की चाह।
जगना-सोना हो आराम, पढ़ना-लिखना आठों याम।।

मन में हो आदर का भाव, उनसे बातें करें सुचाव।
सबसे ऊँचा उनको मान, अपने हित में उनको जान।।

रहवैया
गाँवों के हम रहवैया, रहते बरगद की छैया।
तुलसी पात रोज लेते, दूध दुहाते हैं गैया।।

मीठी छाछ पिवैया हैं, नीके रास रचै या हैं।
दुश्मन से टक्कर लेते, मुरली मधुर बजैया हैं।।

हम हलधर के भैया हैं, श्यामा श्याम कन्हैया हैं।
अपना श्रम कर आप जियें, गोपी ग्वाले गया हैं।।

मस्त पवन पुरवैया हैं, ठंडे जल की कुइया हैं।
हिलमिल खाना हम खाते, सबकी पीर हरैया है।।

मामा के घर जाऊँगा
अब तो सीख गया मैं चलना मामा के घर जाऊँगा।
मामा रूठ गया है माँ से, जाकर उसे मनाऊँगा।।

चम-चम,चम-चम चमके मामा, मैं भी चमक बताऊँगा।
खाऊँ खीर कटोरा भरकर, सरर-सररपी जाऊँगा।।

मामी मेरी चमक चाँदनी, मुझ पर लाड़ लड़ाएगी।
पहन सितारेदार ओढ़नी, मुझको साथ नचाएगी।।

मैं मामी को ले आऊँगा, माता खुश हो जायेगी।
चौदह रात रहेगी संग में, मामी हाथ न आयेगी।।

कविताएं | Hindi Poems 

हवा
सरर-सरर चल रही हवा, फरर-फरर बह रही हवा।
मन को मौज कराती है, सबको खुश कर जाती है।।

लू ले आती गरम हवा, लगती जैसे गरम तवा।
अंगारा बन जाती है, साँय-साँय भुरसाती है।।

सनन-सनन है सर्द हवा, कँपती हड्डी कड़क हवा।
गरम शाल पहनाती है, आ हमको ठिठुराती है।।

मधुरिम-मधुरिम मस्त हवा, फुरती लाती चुस्त हवा।
मस्ती लेकर आती है, बागों में ले जाती है।।

एकता
तेरा मान मेरा गान, मेरा मान तेरा गान।
ये प्रेम-भाव समान है, सम भाव सब संतान हैं।।

तेरा देश मेरा वेश, मेरा देश तेरा वेश।
सब एक लय का भाव है, सम भाव सब संतान हैं।।

तेरी बात मेरे साथ, मेरी बात तेरे साथ।
बस एक ही अरमान है, सम भाव सब संतान हैं।।

तेरा काम मेरे नाम, मेरा काम तेरे नाम।
ये एक दिल दो जान हैं, सम भाव सब संतान हैं।।

बदलाव
अब पहली सी बात नहीं है, दिवस नहीं है, रात नहीं है।
शोर शराबा मचता भारी, प्रेम-नेम बरसात नहीं है।।

रिश्ते-नाते बदल गये हैं, अंकल में सब सिमट गये हैं।
बूढ़ों की ख्वारी है भारी, अपने थे सब खिसक गये हैं।।

नारी को अपमान मिला है, पग-पग शोषण फूल खिला है।
भ्रूणों की हत्या है जारी, समता का ढह गया किला है।।


चारों ओर प्रदूषण फैला, हर सफेद होता मटमैला।
जहर घुला है अब तो भारी, है हर दिन नहले पर दहला।।

खर्च न होता एक छदाम
रोज सवेरे उठ जाता हूँ, पृथ्वी माँ का करता ध्यान।
धरती है माता की माता, सबसे पहले इसका मान।।

मात-पिता के पास पहुँचता, हाथ जोड़कर करूँ प्रणाम।
घर में रहते दादा-दादी, उनको झुककर करूँ सलाम।।

खाना खाने से पहले मैं खाने को भी करूँ प्रणाम।
पहला गस्सा तोड़ रखू मैं, गौ माता का लेकर नाम।।

जैसा बता दिया दादा ने, वैसा करता हूँ मैं काम।
मिलता प्रेम मुझे सबसे ही, खर्च न होता एक छदाम।।

खेल कराता हरदम मेल
आओ साथी खेलें खेल, खेल-खेल में कर लें मेल ।
काना-बाती कुर्रम कूर, मची गुलगुली रेलम पेल।।

गुटकों का भी सुन्दर खेल, सखियाँ सब मिल खेलें खेल।
हिला रहा है कोई झण्डी, सब मिलकर बनते हैं रेल।।

कोई खेले घर के अंदर, कोई खेले बिल्ली-बंदर।
खेल रहे हैं बल्ला लेकर, आये हैं, वे घर के बाहर।।

वे मोटर को रहे धकेल, नहीं डालते डीजल तेल।
पों-पों-भौं-भौं सभी करें, खेल कराता हरदम मेल।।

वोट यहाँ पर बिकते हैं
यह जग गोरख धंधा है, आँखे होते अंधा है।
उल्टे सीधे काम यहाँ, सच्चे भी बदनाम यहाँ ।।

सड़ा-गला सब मिलता है, माल मिलावट चलता है।
असली नकली बिकता है, बिका हुआ फिर बिकता है।।

बिकता है इन्सान यहाँ, बिकता है भगवान यहाँ।
रक्षक भक्षक बने खड़े, तक्षक डसते पड़े-पड़े ।।

पुलिस यहाँ पर बिक जाती, चोर पकड ना बतलाती।
महँगे होते काम यहाँ, ठेके सब बदनाम यहाँ।।

पों-पों, भों-भों
कार दौड़ती पों-पों-पों, कुत्ता पूँका भों-भों-भों।
कार दौड़ती कुत्ता भी, हाथ न आती पों-पों-पों।।

नया आदमी आता है, कुत्ता शोर मचाता है।
जिसको प्यार करे कुत्ता, अपनी पूँछ हिलाता है।।

मैं उसको रोटी लाता, बड़े चाव से वह खाता।
जब भी भूख सताती है, भौं-भौं मूंक बुलाता है।।

मैं कहता बब्बर उसको, माँ कहती जब्बर उसको।
ऊँचे कद का कुत्ता है, सब कहते डॉगी उसको।।


Hindi Diwas 2019 Poem, Kavita, 

शिकायत
माँ से भाई की शिकायत
बहन मारती है माँ मुझको, साथ खिलाती कभी न मुझको।
कहती रहती मुझझे छोटा, डाट लगाओ तुम माँ इसको।।

बहन का जबाब
तुम माता मुझसे ही कहती. भैया के संग हँसती रहती।
मुझको डाट पिलाती हो माँ, भैया के नखरे सब सहती।।


माता का प्यार तुम दोनों ही मुझको प्यारे, मेरी आँखों के दो तारे।
कोई बड़ा न कोई छोटा, माता के तुम राज दुलारे।।

सरगम
हम बच्चे हैं हममें दम-खम, सन्नाटों में हम हैं सर-गम।
काम सभी पूरा कर लाएँ, हँसते रहते हम सब हरदम।।

खेल खेलते हैं हम हिल-मिल, चमकें तारे जैसे झिल-मिल।
कौन पराया पता बताएँ, काम करे ना घुटकर तिल-तिल ।।

साहस के पुतले हम साथी, कोई चींटी हो या हाथी।
कौतुक करके हम बतलाएँ, पिछड़ गये हम उनके साथी।।

गीत सुहाने गाते हैं हम, बिन पायल नाचें हम छम-छम ।
नये रूप धर स्वाँग बनाएँ, धूम मचाएँ गाएँ पम-पम ।।

टाई
माँ मुझको टाई लाना, टाई बाँध मुझे जाना।
मेरी अच्छी लवली माँ, बढ़िया सी टाई लाना।।

रोज-रोज टाई बँधती, बच्चों पर अच्छी जमती।
टाई बाँधी चुस्त रहे, टाई पहन बहन हँसती।।

लाल गुलाबी टाई है, टाई रंगत लाई है।
बच्चों का यह फैशन है, टाई मन को भाई है।।

यह है शाला की टाई, गाँठ गले में बँधवाई।
बच्चों को इकसार बँधी, टाई से बहार आई।।

अपने हिस्से लड्डू चार
मामा लाये लड्डू चार, हम खाने को थे तैयार।
लड्डू देखे मामा हाथ, आई अपने मुँह में लार।।

लड्डू पाये हमने चार, मामा का माना आभार।
मामा भी थे अपने साथ, उनको भी थी खुशी अपार ।।

लड्डू खाये हमने तीन, हम लड्डू खाने में लीन।
लड्डू बचा हाथ में एक, उसे ले गया कौआ छीन।।

खडे हुए थे हम लाचार, मन से हमने मानी हार।
बरस रहे थे अपने नेत्र, खुशी हो गई अपनी छार।।

अपने बूते काम करें
फ़ैश रहें हम फ्रेश रहें, मन में तनिक न क्लेश करें।
हैंशन है जड़ रोगों की, इस पर कभी न ध्यान धरें।।

किल्लत में ना काम करें, हिम्मत ना बदनाम करें।
लें न किसी से पंगा हम? अपने बूते काम करें।।

टीम बनाकर काम करें, हँसते-खिलते काम करें।
प्रैशर में ना रहें कभी, दिक्कत समझें दूर करें।।

आकर कोई बोर करे, ऊँचा बोले शोर करे।
उससे क्या लेना-देना, बिना काम जो जोर करे।।

नाना-नानी
नानी ने बुलवाया है, मामा लेने आया है।
गरमी की छुट्टी आई, मौका मन को भाया है।।

नानी के घर जायेंगे, के सर बाटी खाएँगे।
घर पर हम अब बोर हुए, ताजा बनकर आएँगे।।

मामा गाना गाएँगे, नाना हमें सिखाएँगे।
मामी नाचेगी छम-छम, बच्चे ढोल बजाएँगे।।

सब थकान मिट जाएगी, नई ताजगी आएगी।
लौट हमें घर आना है, शाला तब खुल जाएगी।।

कछुआ
कछुआ जल में रहता है, कभी न कुछ भी कहता है।

पानी से बाहर आता, कछुआ मन में डर जाता।।

जल में इसका जोर बड़ा, अंग छिपाए रहे पड़ा।
जल में कोई जा धंसता, उसका दाव तभी लगता।।

उसकी पीठ रिपटनी है, जल से बनी फिसलनी है।
लाख उपाय करें भाई, कोई चीज न टिक पाई।

कछुआ सब कुछ खाता है, जामुन को ललचाता है।
आटे के गोले खाता, बैठ किनारे ले जाता।।

दादा
दादा बड़े-बड़े मैं छोटा, दादा दुबले मैं हूँ मोटा।
उछल-कूद मुझको प्यारी है, दादा से मेरी यारी है।।

दादा रखते मोटा सोटा, मुझको कहते पोता खोटा।
पूरे मन से प्यार लुटाते, मैं खुश रह लूँ जुगत जुटाते।।

दादा जाते हैं जब कोटा, बगल दबाकर अपना सोटा।
सोटा उनका सच्चा साथी, इससे करते वश में हाथी।।

यहाँ रहे या जाएँ कोटा, रहता पास बड़ा सा लोटा।
दादा पीते उससे पानी, दादा को रहती आसानी।

चित्र
हम बच्चों ने चित्र बनाये, पापा चित्र देख हरषाये।
दिखा रहे है, मम्मी को भी, मन ही मन मम्मी मुस्काये।।

चित्रों में पशु-पक्षी प्यारे, कीट-पतंगे मित्र हमारे ।
चित्रों में बादल काले हैं, बहते बरसाती नाले हैं।।

पेड़ों में फल-फूल उगाये, खा जाने को मन ललचाये।
रंग भरे सब चित्र सजाये, असली जैसे रूप लुभाये ।।

चित्र मूक हैं फिर भी बोलें, पैर नहीं हैं फिर भी डोलें।
इनकी ताकत को पहचानें, इनको खोलें मिसरी घोलें।।

Hindi Love Poems

मछली
मछली रहती जल के अन्दर, थल पर रहते भालू बन्दर।
पानी से मछली का नाता, बंदर पानी से घबराता।।

रंग-विरंगी मछली सुन्दर, नीली आँखें पानी अन्दर।
कोमल काया काँटों वाली, काँटे करते है रखवाली।।

नाक नहीं पर साँसें भरती, जोखिम से यह कभी न डरती।
पता नहीं मछली क्या खाती? जल में भोजन कैसे पाती??

सचमुच मछली जल की रानी, जीवन इसका केवल पानी।
पानी सूखा यह मर जाये, पानी पर वह बलि-बलि जाये।।

ऊँट
ऊँट हमारी बना सवारी, लंबी गरदन कुब्बा भारी।
रेतीले टीबों पर जाता, कभी रेत में धंस ना पाता।।

ये मरुथल जहाज कहलाता, लंबी दूरी दौड़ लगाता।
ठुमक ठुमक, कर नाच दिखाये, सज-धज कर मेला में जाये।।

ऊँचा पेड़ कहीं पाता है, तोड़ पत्तियाँ यह खाता है।
पानी पीता रखता थैली, काया इसकी है मटमैली।

ऊँट देख सब खुश हो जाते, सैर-सपाटे मौज मनाते ।
इसकी रखते सब निगरानी, खूब खिलाते दाना-पानी।।

फूल


फूल खिल रहे फुलवारी में, कलियाँ महकी हैं क्यारी में।
गेंदा और गुलाब लगाया, खिलते देखा जगत लुभाया।।

हरसिंगार बाग में मिलते, कमल सदा पानी में खिलते।
चंपा और चमेली महकी, केली रंग-विरंगी चहकी।।

खुशबू भरा मौगरा आया, बहनों ने गजरा बनवाया।
पीली लाल कनेर घनेरी, फूल पलाश आग की ढेरी।।


कहीं विदेशी फूल खिले हैं, देशी के सँग गले मिले हैं।
फूल खिल रहे डाली-डाली, मन ही मन खुश होता माली।।


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